कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला बाल संरक्षण एवं जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक संपन्न

कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा की अध्यक्षता में नवीन कलेक्ट्रेट के सभागार में मंगलवार को जिला बाल संरक्षण एवं जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा ने कहा है कि शहर में दो बाल सम्प्रेक्षण गृह संचालित है, जबकि बच्चों की संख्या कम है तो दो के स्थान एक बाल सम्प्रेक्षण गृह संचालित किया जाये। बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री हंसराज सिंह, सीएमएचओ डॉ. आरसी बांदिल, जिला महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी श्रीमती अनुपमा राय, सीएसपी प्रियंका मिश्रा, बाल कल्याण समिति के श्री राकेश शिवहरे, डॉ. नीरज गुप्ता, शिक्षा, ट्रायवल, वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी श्रीमती अर्पूवा चौधरी, एनजीओ सुश्री आशा सिकरवार, श्री देवेन्द्र भदौरिया, बाल सम्प्रेक्षण गृह के अधीक्षक श्री सुखवीर सिंह तोमर, संरक्षण अधिकारी श्री ब्रजराज शर्मा, श्री रविकान्त दुबे, सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। 
    कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा ने कहा है कि जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बालकों के देखरेख संरक्षण के एवं पुर्नवास हेतु शासकीय तथा अशासकीय बाल देखरेख संस्थायें किशोर न्याय अधिनियम 2015 द्वारा संचालित है। शासकीय सम्प्रेक्षण गृह मुरैना में विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों को किशोर न्याय बोर्ड के आदेशानुसार 8 से 18 वर्ष तक के बालकों को निरूद्ध रखा जाता है। वर्तमान में छात्र संख्या 36 है। संस्था के समस्त बालकों को संस्थान में रहकर ही मूलभूत शिक्षा प्रदाय की जाती है। कलेक्टर ने कहा कि इसके अलावा क्रान्तिकला संगम एमएस रोड़ मुरैना पर संचालित है, जिसमें 6 से 18 वर्ष तक के अनाथ परित्वत, गुमशुदा, अभ्यर्पित, भिक्षावृत्ति में लिप्त बालकों को बाल कल्याण समिति मुरैना के आदेश पर वर्तमान में 6 बच्चे निवासरत है। विवेकानंद युवा मंडल वनखण्डी रोड़ मुरैना में संचालित है, जिसमें वर्तमान में दो बालक निवासरत है। इसी प्रकार गहोई शिक्षा प्रसार समिति संजय कॉलोनी मुरैना में संचालित है, जिसमें 0 से 6 वर्ष तक के अनाथ परित्वत, गुमशुदा, अभ्यर्पित बालकों को बाल कल्याण समिति के आदेश पर प्रवेश दिया जाता है। वर्तमान में कुल 3 बच्चे निवासरत है।
    कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा है कि जिले में शासकीय वन स्टॉप सेेंटर संचालित है। वन स्टॉप सेंटर के अन्तर्गत सभी प्रकार की हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं को एक स्थान पर स्थाई आश्रय, पुलिस डेस्क, विधि सहायता, चिकित्सा एवं काउसलिंग की सुविधा, वन स्टॉप सेंटर ऊषा किरण केन्द्रों पर उपलब्ध कराई जाती है। इसके उद्देश्य है कि एक ही छत के नीचे हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं को एकीकृत रूप से सहायता एवं सहयोग प्रदान करना है। बैठक में जो भी निर्णय हुये है उस पर अमल की जरूरत है। वन स्टॉप सेन्टर के नजदीक सीवर जैसे बिन्दुओं पर कमियां मिली है उस पर नगर निगम को निर्देश दिये जायेंगे। 

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री हंसराज सिंह ने कहा है कि इस बैठक में सम्मिलित सभी अधिकारी, पदाधिकारियों के नम्बर द्वारा वाट्सएप तैयार किये जाये। किसी भी प्रकार की छोटी से छोटी एक्टिविटी को उस पर शेयर किया जाये। उन्होंने कहा कि मुझे किसी भी समस्या के समाधान के लिये कभी भी फोन किया जा सकता है।
    एनजीओ सुश्री आशा सिंह ने कहा कि महिला वन स्टॉप सेंन्टर या थाने की सीढ़ी पर पहुंचने के लिये मन में तीन बार विचार करतीं है। इसके लिये महिला को सर्वप्रथम स्वास्थ्य सुविधाओं के नजदीक एक डॉक्टर नियुक्त हो। जो महिलाओं की प्राथमिक स्तर पर समस्या को समझें। उसके बाद ही आगे के लिये निर्णय तय हो, इस प्रकार की सुविधा बनाई जाये। 

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