कम्प्यूटर का ज्ञान प्राप्त कर माया आजीविका स्वसहायता समूह गोठ की महिलायें बना रहीं है आयुष्मान भारत कार्ड

महिलायें भी पुरूष से कहीं कम नहीं है। ये सब साकार हुआ है मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा समूह में जुड़कर। जो कि महिलाओं ने आयुष्मान भारत कार्ड बनाने का जिम्मा हाथ में लिया था, अभी तक समूह 450 कार्ड भी बना चुका है।        
    ग्राम गोठ ’’माया आजीविका स्व-सहायता समूह’’ की अध्यक्ष श्रीमती अल्पना तोमर ने बताया कि महिलायें क्या नहीं कर सकतीं। महिलायें पुरूषों से भी पीछे नहीं है। वर्ष 2018 में एनआरएलएम के मार्गदर्शन में मेरे द्वारा स्व-सहायता समूह का गठन किया गया था, जिसमें 10 महिलायें शामिल की थीं। समूह की सभी महिलायें अत्यन्त गरीब परिवार से थी, उन्हें कोई मार्गदर्शन और आजीविका चलाने के लिये रोजगार की जरूरत भी थी। किंतु मेरे द्वारा समूह का गठन किया और 20-20 रूपये प्रति महिला के मान से प्रति सप्ताह इकट्ठा कर करीबन 40 हजार रूपये की बचत बैंक में जमा हुई। इसके बाद शासन द्वारा प्रति महिला 10 हजार रूपये के मान से एक लाख रूपये की राशि प्राप्त हुई। समूह द्वारा धीरे-धीरे झाड़ू बनाने का कार्य किया। उससे भी कुछ आय प्रति महिला के मान से प्राप्त होने लगी। समूह में कुछ महिलायें अच्छी पढ़ी-लिखी भी थीं। जिन्हें अल्प ज्ञान कम्प्यूटर में कराना जरूरी था। एनआरएलएम द्वारा समूह को कम्प्यूटर का ज्ञान कराया, तब महिलाओं ने आयुष्मान भारत कार्ड बनाने का जिम्मा हाथ में लिया। आज तक माया आजीविका स्व-सहायता समूह द्वारा 450 आयुष्मान भारत कार्ड निःशुल्क बनाये जा चुके है। समूह की अध्यक्ष श्रीमती अल्पना तोमर ने बताया कि प्रति कार्ड शासन द्वारा जो भी मानदेय मिलेगा उसे हम स्वीकार करेंगे।                 

                                              मोबा. नं. 9926223757

डी.डी.शाक्यवार 

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